| विभाग | पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग |
| योजना का नाम | प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-III |
| हितग्राही मूलक है या नही | नहीं |
| अधिकार क्षेत्र | राज्य प्रवर्तित योजना |
| योजना कब से प्रारंभ की गयी | 2019 |
| योजना का उद्येश्य | प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-III का प्रारंभ केन्द्रीय सरकार द्वारा 15 अगस्त 2019 को किया गया।योजना के अंतर्गत ग्रामीण कृषि बाजार, स्वास्थ्य सुविधायें, शिक्षा सुविधायें एवं यातायात अवसंरचना को जोड़ने वाले पूर्व से विद्यमान ग्रामीण मार्गो का उन्नयन किया जा रहा है। |
| लाभार्थी के लिए आवश्यक शर्ते / लाभार्थी चयन प्रक्रिया | प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-III में मार्गो को चयनित करने के पूर्व जनगणना 2011 की आबादी एवं ग्रामों में उपलब्ध सुविधाओं के विवरण के आधार पर जिला ग्रामीण सड़क प्लान (DRRP) तैयार कर GIS पर अपलोड किया गया तथा ग्रामों में ग्रामीण कृषि बाजार, स्वास्थ्य सुविधायें, शिक्षा सुविधायें एवं यातायात अवसंरचना से संबंधित सुविधाओं के फोटोग्राफ जियो टैग किये गये एवं दिशा निर्देश में निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप केंद्र सरकार से प्राप्त सॉफ्टवेयर से सिस्टम के माध्यम से ट्रेस मैप प्राप्त कर मार्गो की रेंक के आधार पर TR/MRL तैयार किये गये तथा दिशा निर्देश में सुविधाओं के लिए निर्धारित वेटेज के अनुरूप स्कोर के अनुसार उपयोगिता मूल्य (UV) के आधार पर सिस्टम जनरेटेड प्राथमिकता सूची CUCPL से वरियता के आधार पर केंद्र सरकार द्वारा आवंटित लंबाई के अनुरूप मार्गो के उन्नयन का प्रस्ताव तैयार कर भारत सरकार की ओर स्वीकृति हेतु चरणबद्ध प्रेषित किये जा रहे है। उपरोक्तानुसार तैयार DRRP एवं CUCPL का संबंधित जनपद पंचायत / जिला पंचायत से अनुमोदन तथा माननीय संसद सदस्यों को अवगत कराते हुये सुझाव प्राप्तु करने की प्रक्रिया का पालन दिशा निर्देश के अनुसार किया गया।
1. भारत सरकार से मार्गों/पुलों की स्वीकृति , प्रशासकीय अनुमोदन एवं तकनीकी स्वीकृति पश्चात कार्य की निविदा आमंत्रित की जाती है। निविदा स्वीकृति उपरांत ठेकेदार से अनुबंध कराया जाकर संबंधित ठेकेदार के माध्यम से कार्य सम्पादित कराये जाते है, जिसकी निगरानी परियोजना क्रियान्वयन इकाई एवं कंसल्टेंसी के तकनीकी स्टॉफ द्वारा की जाती है। निर्माण कार्य में गुणवत्ता निगरानी हेतु स्वतंत्र रूप से नियुक्त स्टेट क्वालिटी मॉनीटर एवं नेशनल क्वालिटी मॉनीटर द्वारा कार्य के दौरान एवं पूर्ण होने पर कार्य की जॉंच कराई जाती है। संभाग स्तर एवं राज्य स्तर से उच्च अधिकारियों द्वारा भी आवश्यकता अनुसार जॉच कराई जाती है।
2. कार्य मापदण्ड अनुसार नहीं पाये जाने अथवा समय पर पूर्ण नही हो पाने पर अनुबंधानुसार कार्यवाही की जाती है।
3. योजना अंतर्गत निर्माण कार्य पूर्ण होने के उपरांत पॉच वर्ष तक गारंटी अवधि (डीएलपी) में होते है जिनके संधारण की जिम्मेरदारी मार्ग निर्माण करने वाले ठेकेदार की ही होती है। संतोषजनक संधारण कार्य नहीं पाये जाने पर नियमानुसार भुगतान में कटौती की जाती है। कार्य अधिक खराब होने एवं अधिकारियों के निर्देशों के उपरांत भी कार्य नियमानुसार संधारित नही होने पर अनुबंध निरस्त करने का प्रावधान है।
4. योजना अंतर्गत मार्गों के निर्माण पूर्व प्रचलित रास्तों एवं शासकीय भूमि पर ही किये जाते है यदि बीच में निजी भूमि आती है तो कृषक की सहमति/दानपत्र के पश्चात ही कार्य कराये जाते है। योजना अंतर्गत मुआवजा भुगतान का कोई प्रावधान नहीं है।
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| लाभार्थी वर्ग | सभी के लिए |
| लाभार्थी का प्रकार | सभी के लिए |
| लाभ की श्रेणी | अन्य |
| योजना का क्षेत्र | Rural |
| आवेदन/संपर्क/पंजीयन/प्रशिक्षण कहाँ करें | जिले में स्थिति परियाजना क्रियान्वयन इकाई/ म.प्र. ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण, मुख्यालय भोपाल |
| पदभिहित अधिकारी | शासन स्तर |
| समय सीमा | समय-सीमा निश्चित नहीं |
| आवेदन प्रक्रिया | शासन के आदेशानुसार |
| आवेदन शुल्क | कुछ नहीं |
| अपील | जिले में स्थिति परियाजना क्रियान्वयन इकाई/ म.प्र. ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण, मुख्यालय भोपाल |
| अनुदान /ऋण /वित्तीय सहायता /पेंशन/लाभ की राशि | लागू नहीं है। |
| हितग्राहियों को राशि के भुगतान की प्रक्रिया / हितग्राहियों को ऋण एवं अनुदान की व्यवस्था /वित्तीय प्रावधान | लागू नहीं है। |
| ऑनलाइन आवेदन हेतु लिंक | pmgsy.nic.in, www.mprrda.org |
| योजना से सम्बंधित दस्तावेज संलग्न करें | यह योजना हितग्राही मूलक योजना नहीं है। अत: व्यक्तिगत रूप से किसी दस्तावेज की आवश्यकता नहीं हे। योजना संबंधी शिकायत होने पर सादे कागज पर शिकायत की जा सकती है। |
| अपडेट दिनांक | 20-05-2026 15:24:42 |